Saturday, 9 May 2009

कस गुरू सुन्यो....

बड़े दिन बाद सब दिग्गज एकै मंच पर नजर आवै वाले हैं। अब सोचो जरा कि जब मंच पर अमरकांत, मारकण्डेय, कालिया, दूधनाथ और शेखर जोशी जैसे कथाकार नजर अइहैं तो कैसा लगी। वरधा से चलकर इहां हिन्दी विश्वविद्यालय आवा है और अपनी क्षेत्रीय इकाई खोल रहा है।वही के आयोजन में सब जुट रहे हैं।
अमें विभूति नारायन राय कुलपति हैं तो ई तो होना ही रहा।
बात ई नय न में। बात इन दिग्गजों के एक मंच पर बइठे की है। अब ई न कह्यो कि एमें कउन अनोखी बात है।
अमें ई तो हम कहै वाले रहे।
हम जानत रहे कि तुम्हे हमरी बात पची नय। अमें अब याद करो जब नमो अंधकार छपा रहा और ओका फोटोस्टेट पूरे शहर में बटवावा जात रहा। ई साहितिक लहकटई करै वाले और भोगे वालन का नाम भी तुम्हे याद होबै करी। अमें उन दिनों ई वाला मामला हर किसी की जुबान पर रहत रहा। अब इहै लोग......।
अमें एक बात ई भी तो है कि बहुत दिनों से ई तरह सजा भवा मंच भी देखै को नय मिला है।
हां में सूनेपन की मार झेल रहे ई शहर के लिए तो ई तरह का आयोजन होना ही बड़ी बात है।
तो गुरू मिलो 9 मई की शाम एजी अड्डे के पास। वहीं से चलबै वाई एम सी ए के सामने।

Wednesday, 6 May 2009

तो अब बारी व्लागरन की

लेयो में जेका डर रहा, वही होय गवा। साहित्यकारन के शहर में व्लागर जुटे लगें। अब ई अपनी बात कहे के लिए मंच पर नजर अइहैं। ताजा हवा नाम की संस्था अपने इलाहाबाद में एक शाम व्लागरों के नाम का आयोजन कर रही है। ई आयोजन में देश के कई नामचीन और गैरनामचीन व्लागर जुटिहैं और अपनी बात रखिहैं। बड़ी बात यह है कि अब व्लागर केवल लहकटई नय करतें, कुछ गम्भीर लेखन भी होय रहा है। ई लिए आयोजन के मायने है। तो फिर निराला सभागार में 8 मई को शाम 5.30 बजे होय वाले ई आयोजन में दिखबो कि नय। अब ई न कह्यो कि कउनो कुत्ता काटे है कि हम आपन समय खराब करी। काहे कि हम तो रहबै करबै। अमें ई तरह का आयोजन जल्दी न होई।