अमें यार बहुत दिन से मन करत रहा कि इलाहाबादी अंदाज में बात किया जाये, पर अपने शहर से न केवल निखालिस इलाहाबादी उड़नछू होय गये हैं, बल्कि इलाहाबादी बोले वाले भी कम होय रहे हैं। यही वजह है कि ब्लाग की दुनिया में आय पड़ा। अब बतरस का सुख तो मिलबै करी साथ में लहकटई भी खूब होई। बस इंतजार करत रहैं। हम यूं गये और यूं आये।