अमें यार बहुत दिन से मन करत रहा कि इलाहाबादी अंदाज में बात किया जाये, पर अपने शहर से न केवल निखालिस इलाहाबादी उड़नछू होय गये हैं, बल्कि इलाहाबादी बोले वाले भी कम होय रहे हैं। यही वजह है कि ब्लाग की दुनिया में आय पड़ा। अब बतरस का सुख तो मिलबै करी साथ में लहकटई भी खूब होई। बस इंतजार करत रहैं। हम यूं गये और यूं आये।
2 comments:
guruji khanti allahabadi photo lagya hai apne...
sir ye baat galt hai apne kaha tha ki roj is blog per likhengay par itna lamba gap. j achi baat nahi hai
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